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रेवा में बहते
मयूर पंख

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रेवा में बहते
मयूर पंख

“ प्रेम कहानियाँ
बारिशों में नाचते वे मयूर हैं
जिनके पंख देह त्यागने के बाद भी
सदियों सम्हाले जाते हैं. “

- प्रेम रस से सराबोर नियोलिट प्रकाशन का नवीनतम उपन्यास रेवा में बहते मयूर पंख से

प्रेम जीवन की गहनतम -सुन्दरतम आकांक्षाओं में से एक है, इसीलिए तो प्रेम कहानीयाँ हमेशा ही आकर्षण का केंद्र रही है. और जब प्रेम कहानी बाज बहादुर और रूपमति की हो कहना ही क्या|

“रेवा में बहते मयूर पंख “ लिखकर श्रीमती निधि जैन ने बाज बहादुर और रूपमती की प्रेम कहानी को जीवंत कर दिया है. इस पुस्तक को पढ़ते हुए आप सहज ही इतिहास के सुसज्जित मांडू में पहुच जातें हैं और सुंदरी ‘रूप’ और उसके प्रेम में आकंठ डूबे ‘बाज’ के रेवा ( नर्मदा नदी ) को मांडू तक ले आने के अभियान के साक्षी हो जाते हैं|

‘रेवा में बहते मयूर पंख . नियोलिट प्रकाशन का नवीनतम उपन्यास है जो आकर्षक कलेवर और सुन्दर रेखा चित्रों से सुसज्जित है उच्च गुणवत्ता का कागज़ और बेहतरीन छपाई तो नियोलिट की पहचान है ही|

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