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Vishwavijeta

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Vishwavijeta
(विश्वविजेता)

  • Hindi Book
  • Written by Mrigank Tripathi
  • Published by Neolit Publication
  • Read beautiful hindi poems that will make you want to read them again and again
  • Would make a perfect gift for hindi poetry lovers

यह किताब दर्जनों कविताओं को मिलाकर रची गयी है। मृगांक त्रिपाठी जी की कविताएँ युवा मन की बेचैनी और दुनिया के उलझाव से उपजी रचनाएँ हैं। उनमें एक सरलता है जो ईमानदारी का आश्वासन देती है। ये वे कविताएँ है जो अपनी बात कहते हुए कविता से कई अधिक कुछ होने का खतरा भी उठाती है। जिंदगी के विभिन्न अनुभवों और परिस्थितियों पर गौर कर कवि ने उन्हें शब्दों में पिरोया है। यह कविताएँ कवि का दर्शन मात्र नहीं है, बल्कि उनकी ज़िन्दगी का एक सफरनामा है। किताब की पहली कविता विश्वविजेता की कुछ पंक्तियाँ - यदि है जगत भयभीत तुमसे, तुम ना समझो विश्वविजेता। प्रेम से पूजें तुम्हें सब, समझो तुम हो सबके जेता। यह किताब हिंदी कविता प्रेमियों और हिंदी पाठकों के लिए एक आदर्श उपहार है।

लेखक का परिचय

मृगांक त्रिपाठी का जन्म उत्तर प्रदेश के जनपद कानपुर देहात में हुआ। दूर-दूर जाकर भ्रमण करना, साहित्यिक कार्यक्रमों में सम्मिलित होना और लेखकों, कवियों व विद्वानों से मिलने में इनकी विशेष रुचि रहती है। साहित्यिक रुचि होने के कारण प्रारम्भ से ही ये विभिन्न ग्रंथो का अध्ययन करते थे फिर स्वयं भी कविता और कहानियों की रचना करने लगे। समय समय पर इनके लेख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। मृगांक त्रिपाठी ने कम उम्र में ही विश्वविजेता नामक अपने प्रथम कविता संग्रह की रचना करके साहित्य जगत में अपनी उपस्थिति दर्ज की है।

This book is a collection of beautiful hindi poems. The poems of Mrigank Tripathi are well-written compositions that stem from the restlessness of the young mind and the entanglements of the world. There is a simplicity in them that assures honesty. These poems, while trying to convey the deep feelings of the writer, also take the risk of being something much more than poetry. The poet has beautifully put into words the many different experiences and circumstances of his young life. These poems are not just the philosophy of the poet, but a journey of his life. The first poem of the book titled ‘Vishwavijeta’ has the following lines - Yadi hai jagat bhaybheet tumse, tum na samjho vishwavijeta. Prem se pooje tumhe sab, samjho tum ho sabke jeta. This would make a perfect gift for hindi poetry lovers and those who are voracious hindi readers.

About the Author

Mrigank Tripathi was born in Kanpur, Uttar Pradesh. He has a special interest in traveling and attending literary events to meet writers, poets and scholars. Due to his literary interests, he has been a voracious reader from a young age. This eventually inspired him to write his own poems and stories. His articles are frequently published in many journals and magazines. Mrigank Tripathi has made his presence in the literary world at an early age by composing his first collection of poems - Vishwavijeta.

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